Aurangzeb का जीवन परिचय | Aurangzeb history | Aurangzeb’s life

प्रिये दोस्तों महान मुगल सम्राटो में Aurangzeb का नाम भी सम्मिलित है। औरंगजेबकलीन इतिहास का ज्ञान प्राप्त करने  के लिए अनेक ऐतिहासिक ग्रन्थ उपलब्ध हैं। इन ग्रंथो में प्रमुख है –

  • मुन्तख़ब-उल-लुबाब (रचनाकार – ख़फ़ी खान)
  • खुलासात-उल-तवारीख (रचनाकार – सुजनराय)
  • ट्रैवल्स-इन-हिन्दुस्तान (रचनाकार – वर्नियर)
  • स्टीरिया-डी-मोगार (रचनाकार – मनूची) आदि।

औरंगजेब का जीवन परिचय

  • पूरा नाम – (Full name)                              – अबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर
  • जन्म – (Birth)                                             – १४  अक्टूबर १६१८दाहोत गुजरात (हिंदुस्तान)
  • मृत्यु – (Died)                                               –  १३ मार्च १७०७ ई.
  • पिता का नाम – (Father’s name)                – शाहजहाँ
  • माता का नाम  – (Mother’s name)             – मुमताज महल
  • पत्नियाँ – (wives)                                         – नबाव बाई, जैनब बाई महल, बेगम नबाव बाई, और उदयपुरी महल।

दोस्तों Aurangzeb महान मुग़ल सम्राटो की श्रृंखला में अंतिम सम्राट था। दोस्तों Aurangzeb के समय में मुगल साम्राज्य का बिस्तर चरम सीमा पहुंचकर पतन की ओर अग्रसर होने लगा था। दोस्तों Aurangzeb का काल मुग़ल साम्राज्य के भौतिक व नैतिक पतन का काल था तथा उसके साथ ही मुग़ल बंश का अंत समीप आ गया था। दोस्तों Aurangzeb की शिक्षा का प्रबंध योग्य तथा अनुभबी शिक्षकों के द्वारा किया गया था। इसमें मेरे मोहम्मद हासिम प्रमुख थे। शीघ्र ही Aurangzeb ने अरबी तथा फ़ारसी भाषाओँ का अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया। दोस्तों शुरू से ही औरंगजेब में धरम के प्रति काफी रूचि थी तथा कुरान के अनुसार पवित्र जीवन गुजरना उसके जीवन का लक्ष्य था

दोस्तों शाहजहां ने उसे वहादुर की उपाधि प्रदान की थी।  दोस्तों औरंगजेब को शाहजहां ने पुणे दक्षिड़ की सूबेदारी सौंप दे थी। दोस्तो बीजापुर और गोलकुण्ड के युद्ध में जब विजय श्री उसका वरड करने बाली थी तभी  उसने पिता शाहजहाँ की बीमारी और मौत की अफवायें सुनी अता उसने उत्तराधिकारी  के युद्ध की तैयारियां आरम्भ  दी।  दोस्तों उसने अपने छोटे भाई मुराद को भी अपनी ओर मिला लिया  तथा एक बिशाल  के साथ आगरा की ओर प्रस्थान किया। दोस्तों मार्ग में दारा की  सेना  को धरमत नमक स्थान परासत करके वह आगे बड़ा।

दोस्तों सामूगढ़ के रड क्षेत्र में डरा के साथ औरंगजेग का भयंकर मुकाबला हुआ। दोस्तों औरंगजेब सामूगढ़ में विजयी बनकर वह आगरा पंहुचा तथा अपने पिता को बंदी बनाकर उसने मुग़ल सिंघासन पर अधिकार कर लिया दोस्तों औरंगजेब ने खुद ही अपना राज्याभिषेक बड़ी धूम धाम के साथ मनाया था।

औरंगजेब के शुरआती कामो का विवरण

दोस्तों  Aurangzeb के सम्राट बनने के  बाद में  अपनी मर्जी चलना शुरू कर दिया। उसमे अपने पूर्वजो सी उदारता तथा धार्मिक शाहिष्ढुता नहीं थी। वह एक निर्दलीय और क्रूर शासक था इसीलिए उसने अपनी नयी नीतियों की घोषङा की की –

  1. मुद्राओं पर कलमा अंकित करबाना बंद कर दिया क्युकी उन्हें काफिर भी सपर्श करते थे।
  2. दोस्तों उसने प्राचीन मस्जिदों का पुनर्निर्माड़  करबाया गया तथा उनमे इमाम, मुअज्जिन, खातीं आदि को सरकार की ओर निश्चित बेतन मिलने लगा।
  3. नौरेज का उत्सब बंद करबा दिया।
  4. दोस्तों दुलदान प्रथा का निषेध कर दिया गया। प्रडाम तिलक लगाने तथा झरोखा दर्शन की प्रथा बंद कर दी गयी। होली मनाना निषध कर दिया गया। सती-प्रथा को अबैध घोसित कर दिया गया।
  5. दोस्तों सम्राट औरंगजेब ने संगीत का जनाजा निकलबा दिया क्यूँकि क़ुरान में उसका निषेध था।
  6. बर्ष गांठ तथा राज्याभिषेक के उत्सब भी बंद कर दिए गए।
  7. दोस्तों कुरान के नियमो के अनुसार कब्रों की इमारतें (मकबरो ) पर छत बनबाने तथा मजार पर स्त्रियों का जाना बंद कर दिया गया।
  8. बैश्याओं को राज्ये से बहार कर दिया गया। बे बिबाह कर के ही राज्ये में रह सकती थी।
  9. मुहर्रम के समाहरोह पर झगड़ा होने के कारन ुसव्का भी सम्राट ने निषेध कर दिया।

दोस्तों धार्मिक परिबर्तनो के अतिरिक्त Aurangzeb ने शुरू में आर्थिक दशा को सुधरने के लिए कुछ नियम बनाये यथ राहदारी तथा पंडरी कर हटा दिया गया।  ये चुंगी के दो प्रकार थे जो सड़को, घाटों तथा बहार से आने बाले खाध तथा पेय पदार्थ पर लगाई जाती थी। खाफी खान के अनुसार सम्राट ने सिंघासन पर बैठने के बाद बिभिन्न प्रकार के ८० करो को माफ़ कर दिया था। दोस्तों सम्राट जहांगीर ने तम्बाकू पर भी चुंगी माफ़  दी। इन आर्थिक सुधारने के परिडामस्वरूप जनता को कुछ सुख-चैन की साँस  अवसर मिला।

औरंगज़ेब की धार्मिक नीति

दोस्तों ये तो हम पढ़ ही चुके है, की औरंजेब एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था तथा इस्लाम के बनाये गए कानूनों पर बिश्बास करता था, जिसके अनुसार सुल्तान का कर्तव्य कुरान के नियमो का पालन करना तथा अपनी गैर मुस्लिम प्रजा के बिरुद्ध जिहाद ( धरम युद्ध ) करना है। दोस्तों वह भारत को’दारुल-हरब’ (हिन्दू राज्य) के स्थान पर ‘दारूल इस्लाम’ (मुस्लिम राज्य ) बनाना चाहता था तथा काफिरों के बिरुद्ध उसने जिहाद शुरू कर दिया था।  

१. धार्मिक सुधारो की घोषड़ा – दोस्तों Aurangzeb ने कुछ धार्मिक सुधरने की घोषडा की, जिनके द्धारा उसने अपने पूर्बजों की धार्मिक सहिषदुता की निति का अंत का दिया।  उसने सिक्को पर कलमा लिखबाना बंद कर दिया।  तुलादान, हिन्दू ढंग से अभिवादन करने की पद्धति, बादशाह के द्वारा दशहरा का उत्शब मनाना श्राद्ध आदि करना बंद कर दिया गया। वैश्यों और नर्तकियों को नगर से बहार निकाल दिए गया और उन्हें विवाह करने के लिए प्रोत्शाहित किया जाने लगा। दोस्तों औरंगजेब ने अपने राजीरोहड़ के गियरबेह बर्ष में उसने संगीत कारों को राज्यदरबार से निकल दिया। निर्दयी सम्राट के हिरदय में दयाभाब उत्पन्न करने के लिए २०० संगीतकारों के संगीत का जनाजा निकला और उसे सम्राट के महल के सामने से ले गए। सम्राट के  पूछने पर जब उसे पता चला की वह सनगीत का जनाजा है तो उसने कहा की इसे मिटटी में इतनी अंदर  दफना दो की वह कभी भी सर न उठा सके।

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२. हिन्दू बिरोधी निति – Aurangzeb को उत्तराधिकारी में हिन्दू रक्त प्राप्त हुआ था। दोस्तों खुद औरंगजेब की एक रानी भी हिन्दू थी, जिसका पुत्र बाद में औरंगजेब का उत्तराधिकारी बना। परन्तु फिर भी औरंगजेब हिन्दुओ का कट्टर शत्रु  था तथा वह इतना कट्टर मुसलमान था,की संसार की कोई भी शक्ति उसे धरम से बिचलित नहीं  शक्ति थी। दोस्तों औरंगजेब  अपने धरम के लिए अपना राज्य भी छोड़ने को तैयार था। यदि ऐसे कट्टर मुस्लमान सम्राट ने यदि हिन्दुओं का बिरोध किया तो कोई हैरानी की बात नहीं है।

३. सामाजिक प्रतिबन्ध – दोस्तों औरंगजेब ने हिन्दुओं पर अनेक सामाजिक प्रतिबन्ध लगा दिये।  राजपूतो और मराठो को छोड़कर कोई भी हिन्दू पालकी हांथी अथबा ईरानी घोड़े पर नहीं चढ़ सकता था। दोस्तों औरंगजेब ने तीर्थ स्थानों पर मेला लगाना भी बंद कर दिया गया तथा होली दिवाली  आदि हिन्दू त्योहारों के सार्वजानिक समाहरोह पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया।

नॉलेज बूस्टर

दोस्तों नए तथ्यों के प्रकाश में पता चलता है, की औरंगजेब कट्टर व क्रूर नहीं था। ९० वर्ष की आयु में वह स्वय युद्ध क्षेत्र में सैन्य सन्चालन करता था। उसके दरवार में जसवंत सिंह, जयसिंघ, रघुनाथ जैसे वीर हिन्दू सेनानी उपस्थित रहते थे, अतः उसे हिन्दुओं को उच्च पदों से बंचित करने बाला कहना गलत है। दोस्तों औरंगजेब के मनसबदारो में एक तिहाई हिन्दू मनसबदार थे जबकि अकबर के यहाँ यह १६ प्रतिशत था। दोस्तों औरंगजेब ने गया, असम आदि में मंदिरों के लिए अनुदान दिया था। वह हिन्दू संतो की बाड़ी सुनता था। संगीत पर प्रतिबन्ध भी बिलषित को दूर करने के लिए लगाया गया था। दोस्तों वह स्वयं मांस भक्षड नहीं करता था। उसका ब्यक्तित जीवन सादगी, निर्मलता व पवित्रता की असज्रे त्रिवेड़ी था।

औरंगजेब की शुरुआती विजयें

 १. विजापुर विजय – दोस्तों औरंगजेब विजापुर के शिया राज्य से चिढ़ता था तथा उसने उस पर विजय प्राप्त करने का फैसला कर लिया था क्योंकि विजापुर उसके बिरोधी मराठो की सहायता करता था। दोस्तों बीजापुर को प्राप्त करने के लिए औरंगजेब ने  तीन बार प्रयास किया था तब कहीं जाकर मिर्जापुर पर प्राप्त की थी।

  •  प्रथम अभियान –  दोस्तों १६६५ ई. में उसने मिर्जा राजा जयसिंघ को एक विशाल सेना साथ विजापुर विजय करने  के लिए भेजा। बीजापुर के सुल्तान अली आदिलशाह की गोलकुंडा के सुल्तान तथा मराठा सरदार शिवजी से सेना से सहायता की। उन्होंने बीजापुर से जाकर १२ मील दूर मुगलो का सामना किया। राजा  जयसिंग को पराजित होकर पीछे लौटने के लिए बी=विवश होना पड़ा तथा मुगलो का पहला अभियान फ़ैल रहा।
  •  दूसरा अभियान – १६७६-८० में  औरंगजेब ने वियजपुर विजय करने के लिए दूसरा अभियान दिलेर खान के सेनावृत में भेजा। दोस्तों दिलेर खान के दुरवव्यहार के कारन उसकी सेना ने विद्रोह कर दिया जिससे उसे १६८० ई. में असफल हो कर लौटना पड़ा।
  • तीसरा अभियान –   दोस्तों दूसरा  अभियान भी फ़ैल होने के बाद औरंगजेब ने अपने दो पुत्रों को भेजा। दोस्तों औरंगजेब की पुत्रो की कार्यते की बजह से  इस बार भी निराशा ही हाथ लगी। फिर दोस्तों हुआ ये की औरंगजेब को स्वयं युध्य  का संचालन करने  के लिए निकल पड़ा। औरंगजेब  के युद्ध में जाने से  विजापुर के सैनिक हताश हो गए तथा १८८६ ई. में उन्होंने आत्मसमर्पड़  दिया।  तो दोस्तों इस तरह से विजापुर पर विजय प्राप्त हुई।

२.  गोलकुण्ड विजय –  दोस्तों विजापुर के बाद  Aurangzeb की नजर गोलकुण्ड पर थी। दोस्तों गोलकुण्ड में इस समय  अबुल हसन शासन कर रहा था जो की की दोस्तों बड़ा बिलासी और तथा अयोग्य सुल्तान था। दोस्तों इस समय विजापुर विजय प्राप्त करके Aurangzebदोस्तों पूरी तरह से निश्चित हो चूका था तथा गोलकुण्ड विजय के लिए वह पूरी शक्ति लगा सकता था। दोस्तों गोलकुण्ड को प्राप्त करने के लिए मुग़ल सेना को काफी कठिनाईयों का सामना उठाना पड़ा था। दोस्तों उस समय वर्षा होने के कारन रसद के अभाब में मुग़ल सेना को काफी भयंकर कष्ट उठाना पड़ा था।  दोस्तों इसका फायदा उठाकर गोलकुण्ड की सेना ने एक रात को मुग़लो पर छापा मारा तथा उनके  तोपखाने के दरोगा को अन्य पाताधिकारी के साथ बंदी बना लिया।

दोस्तों इस पर औरंगजेब ने तीन सुरंग बनाकर उनमे बारूद बिछबाकार दुर्ग को  उड़ाने का प्रयास किया परन्तु वह इसमें बिफल रहा तथा सहस्त्रा मुगलो की हत्या हो गयी। दोस्तों जब Aurangzeb शक्ति के  पर दुर्ग पर अधिकार न कर  सका तो उसने छल बल का सहारा लिया। उसने राजा के एक सेवक को धन का लालच देकर दुर्ग का फाटक खुल्बा लिया। दोस्तों जिस के चलते मुग़ल सेना दुर्ग में दाखिल हो गयी।  इस तरह से मुग़ल सेना ने दुर्ग पर अपना कब्ज़ा कर लिया।

         नौलेज बूस्टर –

दोस्तों मुग़ल मंस का अंतिम सम्राट अहमद शाह (१७४८-१७५४ ई.) आलमगीर दितीये (१७५४-१७५९ई) और शाह आलम दितीये (१७५९ -१८०६ ) के शासन काल में कई   बार भारत पर हमला किया। दोस्तों मुग़ल बंस का आखिरी सम्राट बहादुर शाह दितीय था, जिसकी मौत अंग्रेजो के अंडर में रंगून (वर्मा ) में हुई थी।

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